Sunday, January 18, 2009

कल्पवृक्ष है बीमा घर

बीमा ज़रूरी है क्यों
पूरी दुनिया में मनुष्य, मानवता और मुद्रा का खतरनाक अवमूल्यन वैश्विक मंदी का कारण बन गया है। इस दौर में इंसान का फ़र्ज़ है कि अपने परिवार, जीवन और भविष्य की हर तरह की सुरक्षा के लिये कुछ उपाय ज़रूर करे। ऐसे उपाय जो उसके रहने या ना रहने पर भी उसके अपनों को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा दे सकें । बीमा ऐसा ही एक कल्पवृक्ष है।

बीमा से सब मुमकिन
आज कल कई तरह की कम्पनियां बीमे बाँट रही हैं। इन असुरक्षित निवेशों के साथ हर तरह के जोखिम हैं। ठीक उसी तरह के जोखिम जो चिट फंड कम्पनियों, सट्टा बाज़ार, डूबते शेयरों और मोहल्ले मोहल्ले चलनेवाले किट्टी फंड्स में रुपया लगाने के अंजाम के रूप मैं सामने आते हैं। सीधी सी बात है। आपकी खून पसीने की कमाई का सारा रुपया डूब जाता है। रुपया तो रुपया उसे लेने वाले तक नज़र नहीं आते।

नामचीन और आजमाई हुयी साख वाली बीमा कम्पनियों के साथ ऐसा नहीं है, इसी लिये तो वो बाज़ार में ज़िंदा हैं। याद कीजिये कुछ ही साल पहले एक बड़ी कंपनी लोगों का करोड़ों रूपया डुबा कर बैठ गयी। एक बड़ी फाइनेंस कंपनी के कर्ताधर्ता सारा रुपया समेत कर विदेश भाग गये। एक दूसरी वित्तीय संस्था ने हालांकि अपना नाम बदल लिया है और बैंकिंग में भी आ गयी है, पर वह भी हजारों निवेशकों के करोड़ों रुपयों को तबाह कर चुकी है। कुछ ही पहले फिल्मों और विज्ञापनों से अपना ब्रांड खड़ा करने वाली एक और वित्तीय संस्था अपने निवेशकों से मुंह चुरा रही है। घरों के लिये लोन देते देते वित्तीय ताकत बनी एक अन्य संस्था अपनी साख के लिये hचिंतित है।

सरकारी जमा योजनाओं में धन जमा करने का मतलब भी आप जानते ही हैं। जब आप रुपया वापस लाने जाते हैं तब अचानक ही आपका फोटो आपके खाते cसे मेल नहीं खाता। आपको अपना पता किसी अफसर या कागज़ से प्रमाणित कराना पड़ता है। इतने पापड बेलने के बाद भी सरकारी बचत खातों के धन वापसी करनेवाले बाबू uसाहब अपनी हथेली पर भी कुछ वज़न चाहते हैं।

और हाँ, सरकारी योजनाओं की ब्याज दरें और निवेश की परफॉर्मेंस भी बजट के ऊँट की करवट जैसी हैं। पता नहीं किस करवट बैठे।

बीमा घर : सोच,समझ और सहायता
सुरमा, बेंत बांस फर्नीचर और ज़री दस्तकारी, आला हज़रात दरगाह, खानकाहे निआजिया, भगवान् शंकर के अनोखे मंदिरों, मूंग की दाल की रसभरी, उत्तरायणी मेला, जैन तीर्थों, अनेक शिक्षण संस्थाओं और विश्व सुन्दरी प्रियंका चोपड़ा के घर के लिये मशहूर बरेली के कुछ युवाओं ने बीमा घर नाम से एक ऐसी संस्था बनाई है जो इन दिनों लोगों को सुरक्षित और बेहद जोखिमरहित निवेश के विकल्प दे रही है। वह भी बिना किसी लालच या कंसलटेंसी खर्चों के। मै एक सरकारी अधिकारी हूँ और मैनें पूरे जीवन मैं ऐसी संस्था नहीं देखी जो ऐसा शानदार काम कर रही हो।

यही समाज सेवा श्रेष्ठ है..
१२ साल तक देश के सबसे बड़े दैनिक हिन्दी अखबारों में एक के शीर्ष अधिकारियों में रहे अनुज अग्रवाल बीमा घर संस्था के कर्ता धर्ता हैं। उनका कहना है, '..हर क्षेत्र में समाजसेवा का काम होता है तो बीमा क्षेत्र को क्यों न चुना जाये। मैने बीमा क्षेत्र इस लिये चुना क्योंकि लोगों को इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।..इस क्षेत्र मैं धोखे बाजी भी सबसे ज़्यादा है, इस लिये मुझे लगा कि यही काम सही है। मुझे मालूम नहीं था कि मुझे इतनी सफलता मिलेगी।...

...जारी